गले की समस्या – थायराईड में उपयोगी उपचार…

गले की समस्या थायराईड की मौजूदगी

गले की समस्या – थायराईड क्या है

अस्वास्थ्यकर खान-पान व बिगडी हुई दिनचर्या के कारण गले की समस्या थायराईड  वर्तमान समय में हजारों-हजार लोगों में बढती जा रही है । हमें मालूम भी नहीं पडता कि कब व कैसे गले की समस्याथायराईड शरीर में उत्पन्न हो चुकी है । समस्या जब बढती है व डॉक्टर के पास जाकर विभिन्न जांचें करवाते हैं तो मालूम होता है कि शरीर की थायराईड ग्रंथि अपना काम ठीक से नहीं कर रही है और अब इसके निदान हेतु एक निश्चित पावर की ऐलोपैथिक गोली नित्य सुबह उठते ही प्रतिदिन लेना अनिवार्य हो गया है ।

गले की समस्याथायराईड से सम्बन्धित इस रोग की मौजूदगी हमारे शरीर में कितनी कम या ज्यादा चल रही है इसके नियंत्रण हेतु दी जाने वाली ऐलोपैथिक गोली 25mg से लगाकर 200mg पावर तक देखने में आती है । यदि हमारा आहार-विहार इसके अनुकुल रहे तो गोली का पावर जो लगभग 4 महिने में एक बार पुनः चैक करवाया जाता है उसके मुताबिक घटते-घटते ये गोली बंद करने की स्थिति में भी पहुंच सकता है, किंतु यदि यही आहार-विहार इसके विपरित चले तो इस गोली का पावर जो बहुसंख्यक लोगों में 25 से 75 mg तक देखने में आता है, वह बढते हुए 200 mg तक पहुंचकर हमें दूसरे जटिल रोगों तक भी पहुंचा सकता है ।

गले की समस्या – थायराईड चिकित्सकीय भाषा में हाइपो थायराइडहाइपर थायराइड के रुप में परिभाषित होती है व इस अनुसार ही इसके लक्षण देखने में आते हैं । वे लक्षण जो इस रोग के कारण प्रायः रोगियों को परेशानी में रखते हैं ये हैं… 

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हाइपो थायराइड –

इसमें थायराईड ग्रंथि की सक्रियता कम हो जाती है जिससे शरीर के लिये आवश्यक T3 व  T4 हार्मोन नहीं बन पाते ।  इससे वजन में अचानक वृद्धि, सुस्ती, आलस, रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी, कब्ज, पैरों व चेहरे पर सूजन व महिलाओं में मासिक चक्र की अनियमितता, रुक्ष त्वचा व बालों का बेजान होकर झड़ना, आवाज भारी होना और तनाव व अवसाद में घिरने जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं ।

हायपर थायराइड

इसमें थायराईड ग्रंथि अधिक सक्रिय हो जाती है और T3 व T4 हार्मोन अधिक मात्रा में बनकर रक्त में घुलने लगता है । इसमें वजन कम होना, भूख बढना, गर्मी सहन न होना, अधिक पसीना आना, मांसपेशियां कमजोर होना, हाथों में कंपन और आंखें उनींदी दिखाई देती हैं, धड़कन बढ़ जाती है, मासिक रक्तस्राव ज्यादा व अनियमित हो जाता है, गर्भपात अधिक होते हैं व चूंकि महिलाएं थायराईड की अधिक शिकार होती हैं, उनका वजन बढ़ने की एक बड़ी वजह भी यही रहती है । इससे कोलेस्ट्रॉल, हड्डियों में कमजोरी, बांझपन जैसी अतिरिक्त परेशानियां सामने आ सकती हैं ।

जांच व उपचार-

थायराईड की जांच हेतु सुबह खाली पेट ब्लड टैस्ट किया जाता है । ब्लड में T3, T4 व TSH लेवल में सक्रिय हार्मोंस को जांचा जाता है व टैस्ट रिपोर्ट्स के अनुसार ही डाक्टर निदान बताते हैं । अधिकतर रोगियों को इसे नियंत्रण में रखने हेतु उम्र भर सुबह खाली पेट दवा खानी पड़ती है, किंतु यदि इसका प्राथमिक चरण में उपचार हो तो ये परेशानियां ज्यादा नहीं आती । मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है ।  

गले की समस्याथायराईड को नियंत्रित रखने के लिये डॉक्टर इसकी नियमित खाली पेट गोली लेते रहने के साथ ही नमक, अचार, पापड, तले हुए भोज्य पदार्थ व मिठाईयों के सेवन से बचने की सलाह के साथ ही नियमित रुप से सुबह कम से कम 30 मिनिट पैदल चलने का सुझाव देते हैं । किंतु यदि हम इस समस्या को जड से मिटाना चाहें तो खान-पान व उपचार में ये अतिरिक्त विकल्प जोडकर इससे पूर्णतः मुक्त होने का प्रयास कर सकते हैं । जानिये कैसे-

सामान्य खानपान में ऐसी चीजें भोजन में लेने से बचें जिससे थायराईड से पैदा होने वाली परेशानियां और बढ़ जाएं । अपने खान-पान को इस प्रकार नियंत्रित करें-

क्या नहीं खाएं :

गले की समस्या – थायराईड के मुख्य कारणों में सोयाबीन व इससे बने सभी पदार्थ दुश्मन नंबर 1 की श्रेणी में आते है, लगभग एक तिहाई बच्चे जो ऑटोइम्यून थॉयरायड से सम्बंधित समस्या से पीडि़त होते हैं उनमें सोया-मिल्क, सोया प्रोटीन या इससे बने नमकीन व अन्य पदार्थ एक बड़ा कारण हैं । इसके अलावा फूलगोभी, ब्रोकली एवं पत्ता गोभी शरीर के थॉयराइड हार्मोन्स के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं अतः इनका उपयोग ना करें । सीमित चाय से वैसे तो हृदय की कार्यकुशलता बढ़ती है किंतु अधिक मात्रा में इसे लेने पर ये थायराईड समस्या को बढाती है, अत: इसका सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें ।

थॉयराइड रोगियों के लिए धूम्रपान जहर के समान है, खासकर सिगरेट के धुएं में पाया जानेवाला थायोसायनेट थायराइड ग्रंथि को नुकसान पहुंचाने वाला एक बड़ा कारण है अत: एक्टिव एवं पेसिव स्मोकिंग से बचें । सी-फूड और आयोडीन वाले नमक का उपयोग नियंत्रित करें ।

कैफीन सीधे थायराईड नहीं बढ़ाता, लेकिन यह उन परेशानियों को बढ़ा देता है, जो थायराईड की वजह से पैदा होती हैं, जैसे बेचैनी और नींद में खलल । रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेडेट फैट अधिक होता है, इससे वजन भी तेजी से बढ़ता है । थॉयराइड वालों का वजन तो पहले ही बहुत तेजी से बढ़ता है इसलिए इसे बिल्कुल बंद करें इसके अलावा रेड मीट खाने से थॉयराइड वालों को बदन में जलन की शिकायत होने लगती है । वैसे भी बडे-बडे फिल्म स्टार्स जो चेहरे की लालिमा बनाये रखने के लिये रेड मीट का सेवन करते रहे हैं उन्हें विदेश जाकर कैंसर का उपचार करवाते हाल ही में देखा गया है ।

बियर व शराब़ शरीर में एनर्जी के लेवल को प्रभावित करती है । इससे थॉयराइड की समस्या वाले लोगों की नींद में दिक्कत और बढ़ जाती है । इसके अलावा इससे ओस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है । वनस्पति घी को हाइड्रोजन से गुजार कर बनाया जाता है । यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को खत्म करता है और बुरे को बढ़ावा देता है । बढ़े हुए थॉयराइड से जो परेशानियां शरीर में होती हैं, ये उन्हें और बढ़ा देता है । ध्यान रहे इस घी का इस्तेमाल खाने-पीने की वस्तुओं वाली दुकानों में पर्याप्त होता है । इसलिए बाहर का तला हुआ खाना न ही खाएं । चांवल, मैदा, मिर्च-मसाले, खटाई, मलाई, अंडा, नमक (सेधा नमक लें) का सेवन अत्यल्प मात्रा में ही करें ।

थायराईड समस्या का रामबाण इलाज

गले की समस्या थायराईड हेतु उपचार

क्या खाएँ-   लहसुन, प्याज, गाजर ये थॉयराइड ग्रंथि को सक्रिय करते हैं जिससे वजन नियंत्रित रहता है अनान्नास खाना या इसका जूस पीना उपयोगी होता है । यह थॉयराइड में बढा हुआ मोटापा दूर करता है । धनिया– चटनी के रुप में या सब्जी में डालकर नित्य सेवन करें । एक कप लौकी का जूस घर में बनाकर किसी अच्छी कंपनी का 30 ml एलोवेरा जूस व दो बूंद पंचतुलसी क्वाथ की मिलाकर पीने के बाद अगले आधा घंटा कुछ भी न खाएं-पिएं बल्कि इस अवधि में प्राणायाम करें । अखरोट, बादाम, आंवला चूर्ण दूध में या पानी में (दिन में दो बार), सोते समय गाय के गर्म दूध में अश्वगंधा का सेवन, अदरक, दूध-दही, पनीर, मुलेठी, गेहूँ के ज्वारे, साबुत अनाज, फल और सब्जियां (टमाटर, हरीमिर्च) उपयोगी होती हैं ।

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सहायक उपचार-

लपेट –  सूती गीली पट्टी व उपर उनी पट्टी की लपेट कंठ के नीचे गले के अग्रभाग में  30 मिनीट लपेटें व इसके बाद गले व गर्दन पर सौंठ का चूर्ण या अदरक के रस का लेप करें या एक साफ़ कटोरी में दो चम्मच पिसी हुई अलसी का पाउडर लें व इसमें बराबर मात्रा में पानी मिलाकर ,इसका पेस्ट बनाकर गले की थॉयराइड ग्रंथि के स्थान पर बाहर से लेप करें I

ठंडा-गर्म सेक – तीन मिनीट गर्म पानी से सिकाई, फिर एक मिनीट ठंडे पानी से सिकाई (तीन बार, फिर चौथी बार तीन मिनीट ठंडी व तीन मिनीट गर्म पानी की सिकाई) दिन में दो बार करना भी समस्या समाधान हेतु उपयुक्त होता है ।

इसके अलावा

  1. त्रिकटु चूर्ण-   (सौंठ+काली मिर्च+पिप्पली बराबर मात्रा में) 50-50 ग्राम लेकर इसमें बहेड़ा चूर्ण 25 ग्राम, गोदंती भस्म व प्रवाल पिष्टी 5-5 ग्राम मिलाकर सिर्फ एक-एक ग्राम मात्रा में सुबह शाम शहद या  (चाहें तो पानी के साथ भी) लेना थॉयराइड की समस्या को दूर करने में फायदेमंद होता है I
  2. एक गिलास पानी में रात भर भिगोये हुए एक चम्मच सूखे धनिये का पानी प्रातः खाली पेट सेवन करने पर थॉयराइड समस्या में कमी होती है I
  3. प्रातःकाल सात कालीमिर्च का एक माह तक निरंतर सेवन एक सप्ताह तक लगातार और फिर सात-सात दिन छोड़कर एक सप्ताह तक लेना भी थायराइड की समस्या में लाभकारी प्रभाव दर्शाता है I
  4. आयुर्वेदिक चिकित्सा में कांचनारपुनर्नवा का उपयोग हायपो-थायराईड की समस्या को कंट्रोल करने में किया जाता है । .इन दोनों का काढा बनाकर तीस मि.ली. की मात्रा में खाली पेट सुबह-शाम लेना लाभप्रद साबित होता है I

उपरोक्त में कोई भी दो तरीके जो आपको आसान व अपने अनुकूल लगे उसका आप सहायक उपचार में प्रयोग कर सकते हैं ।

योग-प्राणायाम व एक्यूप्रेशर-

योग-प्राणायाम – भुजंगासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन, ब्रह्ममुद्रा, उज्जायी प्राणायाम (गले को संकुचित करके पूरे जोर से उपर सांस खींचना) व कपालभाती प्राणायाम हायपो एवं हायपर थॉयराईड दोनों ही स्थितियों में लाभप्रद होते है । इससे वजन बढऩा, थकान एवं अवसाद जैसी स्थितियों से बचने में पर्याप्त मदद मिलती है ।

एक्यूप्रेशर – पैरों और हाथों के अंगूठे के नीचे कुछ उठे हुए भाग को बांए से दांए व प्रेशर सहित कम से कम 3-3 मिनीट दिन में दो बार दबाएं ।

सावधानी– आप इनमें से कितने भी व कैसे भी उपचार करें किंतु यदि आप इसके नियंत्रण के लिये नित्य सुबह गोली ले रहे हैं तो उसे अपनी अगली ब्लड टेस्ट रिपोर्ट तक बगैर डॉक्टर की सलाह के बंद या कम पावर में न करें । आपके शरीर में दिखने वाले अनुकूल परिणामों की जांच रिपोर्ट से डॉक्टर को ही यह निर्धारित करने दें । 

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