Tea’s – कार्यस्थल की चाय और प्लास्टिक बैग में पैक होने के नुकसान…

Tea's - चाय के प्लास्टिक बेग में दुष्परिणाम.

आज जो चाय आप अपने कार्यस्थल पर  प्लास्टिक बैग में पैक पी रहे हैं, उसकी अधिकता हमारे पेट के लिए हानिकारक होती है, इससे नींद उड़ सकती है व अधिक चाय से एसिडिटी हो सकती है और इन सबके साथ यदि यही चाय बार-बार प्लास्टिक बैग में पैक की हुई हम पी रहे हैं तो आगे चलकर इससे कैंसर रोग की गिरफ्त में फंसने की पूरी-पूरी संभावना बन जाती है ।

चाय और प्लास्टिक बैग में पैक के दुष्प्रभाव – Side effects of tea in plastic bag.

किसी क्षेत्र विशेष में ही नहीं बल्कि शायद देश भर में दिन में पी जाने वाली चाय जो बहुसंख्यक भारतीयों की कई कारणों से सर्वाधिक पसंदीदा पेय है, ये लगभग सभी दुकानों, ऑफिसेस, गोडाउन व कारखानों में आती है और शॉर्टकट में ये प्लास्टिक के बैग में पैक करवाकर व पेपर अथवा प्लास्टिक के ही कप में डालकर पीने व पिलाने में इन सभी जगहों पर 75%  से भी अधिक इसी प्रकार उपयोग में ली जाती है ।

सामान्यतः अधिकांश संस्थानों में दिन में दो बार इसी प्रकार प्लास्टिक के बैग में पैक करवाकर इस आवश्यकता की पूर्ति की जाती है, यहाँ तक कि अधिकांश संस्थानों में आने वाले ग्राहकों व मिलने आने वालों को भी इसी तरह से प्लास्टिक के बैग में मंगवाई हुई चाय सर्व की जाती है । निश्चय ही इस प्रकार चारों ओर चाहे-अनचाहे फैलते जा रहे बीमारियों के चक्रव्यूह में ये भी ऐसा महत्वपूर्ण कारण बन रहा है जिसे हम आगे बढकर गले लगाए चले जा रहे हैं ।

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ऐसे सस्ते प्लास्टिक के बैग में गर्म चाय ही नहीं बल्ति कोई भी पीने वाली तरल वस्तुओं में इसका प्रयोग सीधे-सीधे इसके उपयोगकर्ताओं को कैंसर जैसी घातक बीमारी की चपेट में ला रहा है । प्लास्टिक के रासायनिक संघटक ऐसे हैं जिनके सम्पर्क में जैसे ही खाने-पीने की गर्म वस्तुएं आती हैं वैसे ही बहुत ही सीमित अनुपात में ये पिघलकर उस खाद्य सामग्री में मिलता जाता है और जब इसमें रखी गई खाद्य सामग्री का यह सिलसिला दिनों और हफ्तों से गुजरते हुए महिनों व सालों तक पहुँचता है तो शरीर में निरन्तर बढता ये थोडा-थोडा जहर एक दिन अचानक आपको किसी लाईलाज रोग की गिरफ्त में लेकर आपकी सारी जिन्दगी और बचत को अस्पतालों की शरण में ले जाता है जहाँ आपके जीवन के साथ ही आपके परिवार का भविष्य भी संकट में पड जाता है ।

प्लास्टिक बैग में पैक चाय के नुकसान से बचाव के लिये

प्लास्टिक बैग में पैक चाय के नुकसान से बचाव के लिये थर्मस फ्लास्क.

इसलिये आप ऐसे किसी भी शॉर्टकट से स्वयं, अपने कार्यालयीन साथी व ग्राहकों और मुलाकातियों को इस रोगजन्य स्थिति से बचाएं व अपनी  आवश्यकता के अनुसार छोटा या बडा थर्मस फ्लास्क अथवा स्टील की कैटली में ये चाय मंगवाएं व एक बार खरीदे हुए कांच के छोटे गिलास में ही इसे पीने व पिलाने की आदत बनाएं । यदि आप इसके लिये पेपर के यूज & थ्रो कप भी काम में लेना चाहेंगे तो वह भी गलत ही होगा क्योंकि उन पेपर कप में आपको अन्दर सतह में मोमिया परत की कोटिंग मिलती है और लम्बे समय तक प्रयोग में लेते रहने से वह भी लगभग प्लास्टिक ग्लास जितनी घातक ही साबित होती है ।

निःसंदेह इस बदलाव में आपको आवश्यकतानुसार उस बर्तन अथवा फ्लास्क को खरीदने के साथ ही कांच के छोटे गिलास को खरीदने का खर्च भी एक बार देना होगा । उन फ्लॉस्क, कैटली अथवा गिलास को दिन में दो बार धुलवाना भी पडेगा, किंतु आगे चलकर जो इस प्लॉस्टिक के शॉर्टकट तरीके के कारण कुछ वर्ष में किसी बडे रोग की गिरफ्त में आकर आपको हॉस्पीटल की जो अनावश्यक त्रासदी सपरिवार भुगतना पड सकती है, उसकी तुलना में ये खर्च और ये अतिरिक्त मेहनत बहुत-बहुत ही मामूली लगेगी ।

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वैसे भी हमारे खान-पान में प्लॉस्टिक का चलन इस सीमा तक बढ चुका है कि यदि हम होटल से खाना भी पैक करवाकर मंगवाते हैं तो ऐसे ही सिल्वर पेपर में पैक रोटियां व प्लॉस्टिक के ही छोटे कंटेनर अथवा थैलियों  में पैक होकर ही गर्म सब्जियां, दाल वगैरह हम तक पहुंचती हैं, जिन्हें हम बिन्दास खाते हैं । हर दूसरे घर में माईक्रोवेव ओवन दिखता है जिसमें खाद्य सामग्री गर्म करने के लिये अधिकतर प्लॉस्टिक के ही बर्तन दिखाई देते हैं यहाँ भी हमें इन बर्तनों को कांच के बर्तनों में परिवर्तित कर लेना चाहिये ।

यदि सैद्धांतिक रुप से भी सोचें तो Prevention is better then cure. याने रोग की गिरफ्त में फंसकर इलाज करवाने की बजाय, रोग से बचाव के रास्ते पर चलना हमेशा बेहतर होता है ।

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