स्वस्थ जीवन के लिये सेक्स सुख का महत्व…

सेक्स कुंठा व संतुष्टी

सेक्स के स्वास्थ्य लाभ

अपने समय की मशहूर व मरहूम सिनेतारिका जौहरा सहगल जो करीब 104 वर्ष की उम्र तक पहुँचने के बाद दुनिया से रुखसत हुईं उनसे अपने शतकीय जन्मदिवस समारोह में किसी पत्रकार ने जब- ‘आपके स्वस्थ्य व दीर्घ जीवन का राज क्या है‘ वाला प्रश्न किया तब खिलखिलाती जौहरा सहगल का जवाब था- सेक्स,   सेक्स,  सेक्स । वह भी तब जब उनके प्राथमिक वैवाहिक जीवन का समापन तो तलाक के रुप में उनकी यौवनावस्था मे ही हो चुका था । विभिन्न सर्वे के मुताबिक भी यह निष्कर्ष सामान्यजन के समक्ष एकाधिक बार प्रस्तुत किया जा चुका है कि जिन लोगों का सेक्स जीवन पूर्ण संतुष्टिदायक रहता है, वे दूसरे सामान्य लोगों की तुलना में अधिक स्वस्थ व दीर्घ जीवन जीते हैं ।

Click & Read Also-

विषतुल्य… 

ठंड भगाए, वजन घटाए व रोगों से बचाये – अदरक का ये काढा. 

दाम्पत्य जीवन के प्रमुख स्तम्भ प्रेम की स्थापना का मूलमंत्र भी सेक्स से जुडी इसी शारीरिक व मानसिक संतुष्टि से रहा है और जहाँ भी दाम्पत्य जीवन में सेक्स संतुष्टी का तालमेल व्यवस्थित तौर पर नहीं जुडता वहाँ या तो विवाह के शुरुआती साल छ: महिनों में ही सम्बन्ध विच्छेद या कई बार विशेष सामाजिक – आर्थिक दबाव में मन मारकर समझौता करते हुए जीवन बिताने की मजबूरी से ग्रस्त अनेकों लोग हमारे आस-पास के माहौल में ही देखने में आते रहते हैं ।

प्राणीमात्र के जीवन में सेक्स की इस आवश्यकता का प्राथमिक आवेग तो इतना प्रबल होता है कि अपने सम्पर्क में आने वाले स्त्री-पुरुषों में आपसी सहमति से शरीर सम्बन्ध  बना लेने से लगाकर, विपरीतलिंगी से सम्पर्क न बन पाने की स्थिति में न सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया से अप्राकृतिक यौन सम्बन्धों से लगाकर सामान्य से वीभत्स प्रकार तक के बलात्कार के समाचारों के बगैर शायद ही किसी दिन के समाचार-पत्र छप पाते हों ।

बहुसंख्यक लोगों में इस शरीर सुख या सेक्स संतुष्टि का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे हर समय सिर्फ इसी क्रिया में संलिप्त रहें बल्कि यह कि उम्र के सामान्य क्रम के अनुसार जैसे शारीरिक विकास के लिये भोजन की आवश्यकता बढती-घटती रहती है वैसे ही जीवन के लिये आवश्यक स्त्री-पुरुष की इस नैसर्गिक आवश्यकता की भी समयानुसार पूर्ति होती रह सके । इसी आवश्यकता की समयानुसार पूर्ति के क्रम को बनाये रखने हेतु समाज-समूहों में विवाह सम्बन्धों की स्थापना का एक सुचारु क्रम बना हुआ है ।

Click & Read Also-

कामशक्ति वर्द्धक योग- 

कच्ची उम्र के ये शरीर सम्बन्ध…! 

इंटरनेट के खुलेपन से बंद – जिंदगी की लयबद्धता…

 

सेक्स संतुष्टी

अब इन वैवाहिक दम्पत्तियों का विश्लेषण यदि किया जावे तो पूर्ण संतुष्ट दम्पत्तियों का अनुपात एक तिहाई भी नहीं दिखाई देता जबकि शेष वर्ग आपसी सम्बन्धों में किसी न किसी कमी की कसक के साथ जीवन गुजारता दिखता है । लीक से हटकर सम्बन्ध बनाकर इस आवश्यकता की पूर्ति कर लेने का परिणाम भी सम्बन्धित व्यक्ति में एक अपराधबोध को जन्म देता है, जो शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को बरकरार रख पाने में किसी सीमा तक बाधक बनता है, वहीं इससे संबंधित कुंठा में जीने वाले लोग अपने जीवन में अनेक किस्म की स्वास्थ्य समस्याओं की गिरफ्त में उलझते दिखाई देते हैं ।

इसलिये स्वस्थ व बेहतर जीवन के लिये ये पूरी तरह से आवश्यक है कि जहाँ तक सम्भव हो अपने जीवनसाथी के साथ अधिक से अधिक मानसिक तालमेल बनाते हुए इस संदर्भ में अपने पार्टनर की इस आवश्यकता को भी हम न सिर्फ भली प्रकार से समझें, बल्कि अपनी अधिकतम क्षमता के मुताबिक उसे पूर्ण करने का प्रयास भी अपनी आदत में स्थाई रुप से शामिल करने की कोशिश निरन्तर बनाये रखें ।

दाम्पत्य जीवन में कर भला तो हो भला वाला यह मूलमंत्र पति-पत्नी दोनों के स्वस्थ व दीर्घ जीवन के लिये आवश्यक है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.