समझौता स्वाद से करें और नेमत स्वास्थ्य की पाएं…

स्वाद में समझौता संतुलित भोजन से

समझौता याने क्या-  अपने योगाभ्यास के दौरान मैंने एक कोटेशन देखा था “स्वास्थ्य मुफ्त मिलता है किन्तु हम उसे लेते नहीं, जबकि बीमारियां पैसे देकर खरीदी जाती हैं जिन्हें हम लाईन में लगकर लेते हैं” । अब यदि भांग-शराब जैसी हानिकारक नशीली आदतों से समझौता न करने वाले शौकीनों की बात की जावे तो यह वर्ग कर्फ्यू, घनघोर बारिश, यात्रा अथवा ऐसे अवकाश दिवस जहाँ पहले से तय हो कि इन दिनों में इनकी उपलब्धि सुगम नहीं होगी, वहाँ ब्लेक में पैसे देकर अथवा पहले से इन्हें खरीदकर रख लेने जैसी तैयारियां सबसे पहले करते दिखते हैं याने पैसे देकर व लाईन में लगकर बीमारियां खरीदने वाले, किन्तु फिर भी प्रतिशत में देखें तो ऐसे लोगों का प्रतिशत बेहद सीमित ही दिखेगा । किंतु बात जब बहुसंख्यक लोगों के प्रतिशत में देखी जावे तो सामान्यत: खानपान की आदत में स्वाद के प्रति समझौता न कर पाने वाले चटखारे के शौकीन लोग अपने इर्द-गिर्द हमें बहुतायद में दिख जायेंगे ।

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समझौता स्वाद से

शाम के समय अधिकांश होटलों में लोग लाईन में लगकर अपनी बारी की प्रतिक्षा करते दिखते हैं, जिनमें मजबूरी में होटल में खाने वाले नगण्य किंतु स्वाद में समझौता न कर सकने वाले शौकीन ही अधिक दिखते हैं । अब स्वाद में विविधता याने चटखारेदार भोजन जिसमें भरपूर तेल-मसाले, बहुत पहले से बनाकर रखी गई ग्रेवी और कई जगह उपयोग में आ चुका पनीर फिर से धोकर नये सिरे से बनाकर परोसा जाता है । वहाँ के स्वच्छ वातावरण की तो हम बात ही ना करें क्योंकि आए दिन खाद्य विभाग की पडने वाली दबिश में बडी-बडी होटलों की अंदरुनी गंदगी सचित्र समाचार-पत्रों में प्रकाशित होते दिखाई देती है । कहने की आवश्यकता ही नहीं है कि ऐसा भोजन उन लोगों को कितना स्वस्थ रख सकता है जो कि महिने में पन्द्रह-बीस दिन बाहर के खाने में ही अपनी संतुष्टी देख पाते हैं ।

इस विषय में सोचने पर एक वर्ग और भी दिखाई देता है और वो है जिन्हें अपनी पत्नियों के बनाये भोजन का स्वाद उनकी रुचि के मुताबिक नहीं दिखता जिसके कारण आए दिन उनके बीच में होने वाली महाभारत, फिर भोजन का बहिष्कार और भूख लगने पर पोहे, कचोरी, समोसे अथवा ऐसे ही वैकल्पिक साधनों से अपनी उदरपूर्ति कर जीवन की गाडी धकाते चलने वाले लोग । अब यदि ऐसे स्वाद के चाहने वाले अपनी मजबूत आमदनी के कारण घर में भोजन बनाने वाली बाई को भी वेतन देकर रख लें तब भी उन्हें भोजन के स्वाद में कतई संतुष्टी नहीं मिलती और वे कुंठित अवस्था में जैसे-तैसे शरीर की भोजन संबंधी आवश्यकता की वैकल्पिक माध्यमों से पूर्ति करते दिखाई देते हैं ।

एक और वर्ग को भी हम इस दायरे में रख सकते हैं जो अपनी पत्नी के हाथों बने भोजन की तुलना हमेशा अपनी माँ के हाथ से बने भोजन के स्वाद से करते हैं और पत्नी का बनाया भोजन परफेक्ट होने के बाद भी प्राय: उससे तालमेल नहीं बैठा पाते । अब ऐसे सभी लोग अपने शरीर में जमा होते जाने वाले टॉक्सीन्स (विषाक्तता) को शरीर की मजबूती के दौर में तो मैनेज कर लेते हैं किंतु धीरे-धीरे एक ओर शरीर में बढती विषाक्तता और दूसरी ओर उम्र के मुताबिक घटते क्रम का स्टेमिना जब दोनों अपना प्रभाव दिखाते हैं तब डॉक्टर्स और हॉस्पीटल के चक्कर लगाते रहना उनका नित्य का क्रम बनता चला जाता है ।

ऐसा नहीं है कि संतुलित व सात्विक भोजन बेस्वाद होता है, लेकिन हमारे मस्तिष्क में पहले से मौजूद मान्यताएँ उस भोजन के प्रति हमारी रुचि जाग्रत नहीं होने देती और हम धीरे-धीरे रोगों की गिरफ्त में उलझते जाते हैं और फिर लोगों से चर्चा में यह भी कहते दिखाई देते हैं कि मैं तो सिगरेट, शराब जैसी नशीली वस्तुओं से हमेशा दूर रहा किन्तु फिर भी न जाने कैसे मुझे इस बीमारी ने जकड लिया ।

भोजन से समझौता बीमारियों की रोकथाम के लिये-

शुगर, ब्लड-प्रेशर, थॉयराईड जैसे राजरोग की गिरफ्त में चल रहे रोगियों को मैंने अक्सर डॉक्टर के निर्देश में नमक, तेज मिर्च, अचार, पापड, तले हुए खाद्यान्न यथा पूडी, कचौरी और इस जैसी अनेकों वस्तुओं के साथ ही मिठाईयों से परहेज रखने की सलाह को सर्वोपरी रुप में देखा है । तो क्या दु:ख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय की तर्ज पर हम शुरु से ही अपने स्वाद को इस मुताबिक विकसित नहीं कर सकते जिसमें भरपूर तेल-मसाले व गरिष्ठ भोजन के रुप में बनने दिखने वाली खाद्य सामग्री को हम सप्ताह में सिर्फ एक या दो बार वह भी सीमित मात्रा में खाने की आदत डालकर शेष समय में यथासम्भव कम वसा वाले भोजन में ही अपनी संतुष्टी तलाशने की आदत बना सकें ।

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भोजन के नियमों में एक और समझौता हम सभी के जीवन में अनिवार्य रुप से उपयोगी होता है और वह है- यदि हम कम खायेंगे तो ज्यादा खा पायेंगे और ज्यादा खायेंगे तो कम खा पायेंगे । तो अपने दीर्घ और निरोगी जीवन की चाहत में यदि हमें अपने स्वाद की चाहत से थोडा समझौता भी कर लेना पडे तो निश्चय ही यह हमारे लिये फायदे का सौदा ही साबित होगा ।

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1 thought on “समझौता स्वाद से करें और नेमत स्वास्थ्य की पाएं…

  1. It’s the best time to make a few plans for the longer term and it’s time to be happy. I have read this publish and if I could I want to counsel you few attention-grabbing things or suggestions. Maybe you could write next articles relating to this article. I desire to learn even more issues approximately it!

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