प्रदूषण व डेंगू – समस्या और समाधान…

प्रदूषण व डेंगू से बचाव

प्रदूषण व डेंगू समस्या से  बेहाल

इस समय न सिर्फ दिल्ली व आसपास के क्षेत्र बल्कि देश में अधिकांश स्थानों पर प्रदूषण व डेंगू का प्रकोप फैलता दिखाई दे रहा है । हम वातावरण में मौजूद कारकों को तो बदल नहीं सकते किन्तु यदि हमारे ईर्द-गिर्द भी ऐसी समस्या दिख रही हो तो कुछ सुरक्षात्मक उपायों के द्वारा हम अपनी सेहत व स्वास्थ्य को इनसे बचाये रखने की इस तरह से कोशिश कर सकते हैं ।

पहले बात करें धूल-धुंए व मच्छरों के कारण उपज रहे प्रदूषण व डेंगू समस्या से बचाव की-

ड्रॉपर द्वारा नाक में दो-दो बूंद सरसों का तेल सोते समय डालने के साथ ही नाभि में भी दो-तीन बूंद यही तेल नियमित डालने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है साथ ही नासिका तंत्र में इन विशाक्त पदार्थों के जमने की समस्या से बचाव होता है ।

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प्रदूषण व डेंगू रोग के उपचार हेतु-

दूध में हल्दी मिलाकर पीने व गुड़ का सेवन करने से प्रदूषणजन्य एलर्जी व अन्य रोगों से बचा जा सकता है ।

दिन में एक बार गिलोय, तुलसी, अदरक, कालीमिर्च व मिश्री डालकर काढ़ा वनाकर पिएं, इससे एलर्जी व सांस संबंधी रोगों से बचाव बना रहेगा ।

दो-दो चम्मच आंवला व एलोवेरा का जूस गर्म पानी में मिलाकर पिएं, शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाने हेतु तरल पेय पदार्थों का सेवन बढ़ा दें ।

यदि आप भयंकर प्रदूषण वाले क्षेत्र में रह रहे हैं तो प्रयासपूर्वक प्रदूषण से बचाव के लिए रोज या एक दिन छोडकर जलनेति करें इससे नासाछिद्रों में चिपके प्रदूषित कण बाहर निकल जाएंगे । दूध में खजूर, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल डालकर पिएँ ।

आवश्यकता के मुताबिक घर में गुगुल, चंदन का धुँआ करने से परिवार में सभी सदस्यों का वायु प्रदूषण से वचाव हो सकेगा ।

डेंगू की रोकथाम-

उपलब्ध जानकारी के अनुसार डेंगू का रोग इसके लार्वा वाले मच्छरों के घुटने के नीचे काटने से अधिक होता है क्योंकि ये मच्छर इससे अधिक उपर नहीं उडते अतः बगीचे में घूमने जाते समय भी कैप्री पहनने की बजाय पूरे पैरों को नीचे तक ढंककर रखने वाले लोअर या पेंट पहनकर जावें, शरीर को यथासम्भव वस्त्रों से ढांककर ही रखें ।

अपने घर के आसपास कहीं भी रुके हुए पानी का जमाव न रहने दें । फ्रिज के पीछे मोटर के पास पानी की ट्रे में एक ढक्कन मिट्टी का तेल या डीज़ल डालकर रखें । कूलर, गमले व ग़़ड्ढों में भी पानी जमा न रहने दें ।

दो लौंग, दो इलायची, पाँच मुनक्का, दस किशमिश सब को एक गिलास पानी में तीन चौथाई रहने तक उबाल लें । इस की दो खुराक बनाकर एक ही दिन सुबह शाम में पी लेने से भी डेगू व चिकनगुनिया से बचाव अवश्य होगा।

यदि डेंगू का बुखार हो तो घबराने की बजाय रोगी के शरीर में पानी की कमी न होने दें । उसे इतना पानी व अन्य तरल पदार्थ पीने को देते रहें कि रोगी हर घंटे, दो घंटे में पेशाब करने जाता रह सके । इसके साथ बचाव के लिये उपलब्ध उपाय ये करें-

डेंगू मच्छर व बीमारी से बचाव

1. अधिक संख्या में प्लेटलेट्स यदि कम हो जावें तो पपीते के 50 ग्राम ताजे पत्ते धोकर काट लें । अब 50 ग्राम पानी को गर्म करके इसमें 20 ग्राम शक्कर मिलाएं व कुछ ठंडा होने पर इसी पानी में पपीते के पत्ते मिलाकर व पीसकर इसका रस निकाल लें व रोगी को पिलाएं । इससे चमत्कारिक रुप से प्लेटलेट काउंट शरीर के लिये आवश्यक स्तर तक लाने में मदद मिलती है । एक बार बनाया हुआ यह जूस फ्रीज में 24 घंटे तक रखकर भी काम में लिया जा सकता है ।

2. गिलोय की बेल का  7-8 इंच का टुकडा एक गिलास पानी में उबालें व पानी आधा रहने पर रोगी को पिलायें । अधिक कडवा लगने पर उसमें थोडी मिश्री मिलादें । पर्याप्त लाभ मिलेगा ।

3. यदि किसी को डेंगू या साधारण बुखार के कारण प्लेटलेट्स कम हो गयी है तो होम्योपैथिक दवा EUPATORIUM PERFOIAM 200 (liquid dilution) की 3 या 4 बूंदे 2-2 घंटें के अंतराल से साधारण पानी में ड़ाल कर मात्र 2 दिन पिलायें, इससे प्लेटलेट्स संतुलित होती है ।

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डेंगू रोगी का खान-पान

इसके अलावा कीवी, नारियल पानी, ग्लूकोज जैसे लिक्विड बार-बार देते रहें । छोटी इलायची के दाने मुख में दबाककर रखें । ध्यान रखें कि रोगी आराम महसूस करते ही काम न करने लग जावे, बल्कि पहले पूरा आराम करके सामान्य अवस्था में आने पर ही श्रम अथवा काम करना प्रारम्भ करे ।

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