नाखून संक्रमण से बचाव…

नाखून संक्रमण से प्रभावित.

नाखून संक्रमण

          नाखून संक्रमण होने पर ये नाखून न सिर्फ  देखने में भद्दे लगते हैं बल्कि ये गंभीर समस्या का कारण भी बन जाते हैं और यदि इनकी व्यवस्थित देखरेख ना की जावे तो यह समस्या एक नाखून से दूसरे नाखूनों तक फैल सकती है । किसी के शरीर में यदि कैल्शियम की कमी हो या वे अपने नाखूनों का समयानुसार ध्यान नहीं रख पाते हों, तो यह समस्या हो सकती है । नाखून में फंगस लगने पर नाखून का रंग पीला होना या उसमें से अजीब सी बदबू आना इसके सामान्य लक्षण हैं । लेकिन यदि आप अपनी उगंलियो के नाखूनों पर ध्यान देते रहते हैं तो इस समस्या से बचे रह सकते हैं । समझिये नाखूनों की देखभाल के तरीके-

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  1. नाखूनों को व्यवस्थित रखें- अगर पैरों के नाखून लंबे हैं तो यह समस्या अपने आप ही पैदा हो जाएगी, बढते नाखूनों को काट-छांट कर हमेशा उन्हें साफ रखें इससे वे गंदगी से दूर रहेगें और उनमें बैक्टीरिया पैदा नहीं होगें ।
  2. नाखूनों को सूखा रखें- गीले नाखून बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन का कारण बनते हैं । पैरों को धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह से तौलिये से पोंछकर सुखा लें ।
  3. पैरों को जूतों से लगातार कसे ना रखें- पैरों में ऐसे जूते-चप्पल पहनें जिनसे हवा पास हो सके । बंद जूतों से पैदा होने वाले पसीने से भी ये बैक्टिरिया पैदा होते हैं । अगर हो सके तो घर में कुछ देर नंगे पांव रहें ।
  4. साफ-सफाई- पैरों में कभी भी एक ही जोडी मोजे को सात-सात दिन तक ना पहनें । इससे बैक्टीरिया और पसीना पैदा होते व बढते रहते हैं । अपने मोजों को डिटर्जेंट से साफ करें ।
  5. सिरका- अपने पैरों को हल्के गरम पानी और सिरके के घोल में डाल कर कुछ देर रखें और फिर साफ करें । इससे नाखून में लगे फंगस सिरके के एसिडिक (अम्लीय) प्रभाव से समाप्त हो जाते हैं ।

नाखून की बीमारी का इलाज

फंगस-संक्रमण की स्थिति में आप इस पर कैनेस्टेन क्रीम (Canesten cream) लगा सकते हैं । इससे संक्रमण का उपचार होगा व नाखून सुरक्षित रह सकेगा । आवश्यकता लगने पर चिकित्सक की सलाह भी अवश्य लें ।

संक्रमण वाले नाखून में पर्याप्त हवा लगने दें, नमीयुक्त जूते-मोज़े न पहनें । जितना हो सके नंगे पांव रहें, यदि संभव हो तो चप्पल या सैंडल्स पहनें । मोज़े या होज़री को रोजाना धोकर ही पहनें ।

कसे हुए जूतों में पैर की उँगलियाँ एकदम पास रहती हैं और उससे एक से दूसरी उँगली में फंगस फैल सकता है । जूते के अंदर का नम, गर्म और बंद वातावरण फफूँद को बढावा देता है । यदि आपको उंची हील्स पहनने का शौक है तो कुछ दिनों के लिए उसे विश्राम दें व ऐसे जूते पहनें जिनमें हवा का प्रवेश हो सके ।

ऐसे नाखून जिनके नीचे फंगस पनप रहे हों वे अपनी जगह से ऊपर उठ जाते हैं । ऐसे में पैरों  को 15-20 मिनट गर्म पानी में डुबाकर रखने के बाद नाखून काटना शुरू करें और नीचे के मैल व फफूँद को जितना हो सके मसल-खुरचकर हटा दें । इसके बाद नियमित रूप से उनकी देखभाल करते रहें ।

रात को 15-20 मिनिट के लिए अपनी पैर की उंगलियों को पानी और सिरके के पतले घोल में डुबाकर रखें । इससे आपके पैर के नाखूनों में फफूंद जीवित नहीं रह पाती । यह उपाय आपको कुछ समय लगातार करना होगा ।

टी ट्री ऑइल की कुछ बूंदें पानी में डालकर अपने पैरों को उसमें 15-20 मिनिट डुबाये रखें, पैरों को हवा में पूरी तरह से सूखाकर फिर पैरों की उँगलियों में विक्स वैपोरब लगायें व उस पर सॉफ्ट मौज़े पहनें । आवश्यकता के समय यदि आप नियमित यह उपाय करेंगे तो आपको कुछ सप्ताह में फंगस के साथ ही जूते व पैर की दुर्गन्ध से भी छुटकारा मिल सकेगा ।  

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विशेष ध्यान रखने योग्य-  संक्रमण वाले नाखूनों पर नेल पॉलिश न लगायें । सार्वजनिक स्नानघाट, स्वीमिंग पुल ऐसे स्थानों पर अपने पैरों व नाखूनों का अतिरिक्त ख्याल रखें । यदि किसी के पैर की उँगलियों के जीवाणु संक्रमण बहुत धीमी गति से स्वस्थ होते दिखें तो उन्हें मधुमेह (diabetes)  के लिए खून की जाँच भी अवश्य करवाना चाहिए । क्योंकि यदि जीवाणु संक्रमण व मधुमेह दोनों साथ में हों तो घाव स्वस्थ न होने की स्थिति में आगे समस्या गंभीर भी हो सकती है ।

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