सोयाबीन तेल – कितना निरर्थक

सोयाबीन तेल

सोयाबीन तेल

यदि आपकी सेल्फ-हेल्थ के विषय में थोडी भी रुचि रही हो तो आपने कहीं न कहीं यह अवश्य पढा या सुना होगा कि खाने में रिफाइंड ऑईल के उपयोग से अनेकों बीमारियां शरीर में उपजती हैं और आप यदि न जानते हों तो यह भी जानलें कि सोयाबीन तेल कभी फिल्टर रुप में बाजार में बिकता ही नहीं है अर्थात् रिफाईंड तेल की सबसे ज्यादा खपत देश में सोयाबीन के तेल के रुप में ही निरन्तर होती है जिसका मुख्य कारण यह भी है कि मूंगफली के तेल की तुलना में यह लगभग 35% तक सस्ता पडता है जबकि तेल को रिफाईंड करने में भी फिल्टर की तुलना में अधिक खर्च तेल मिलों को करना होता है । यदि हम यह समझने की कोशिश करें कि आखिर क्या कारण है कि इस तेल को रिफाईंड करना ही पडता है तो कारण यह दिखाई देता है कि  सोयाबीन एक दलहन हैं,  तिलहन नहीं ।

दलहन में मुंग, मोठ, चना, सोयाबीन, व सभी प्रकार की दालें होती हैं और तिलहन में तिल, सरसों, मुंगफली, नारियल, बादाम, ओलीव आयल, आदि आते हैं ।

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सोयाबीन तेल कैसे बनाया जाता है

सोयाबीन तेल वास्तव में पाम ऑईल ही होता है और इसी पाम ऑईल मिक्स सोयाबीन का बिक्री योग्य तेल बनाने के लिये इसे रिफाईंड करना पडता है । सोयाबीन की एक खासियत यह होती है कि यह प्रत्येक तरल पदार्थ को सोख लेता है । पाम ऑईल काला और गाढ़ा होता है, जब उसमे साबुत सोयाबीन डाला जाता है तो यह सोयाबीन बीज उस पाम ऑईल की चिकनाई सोख लेते हैं और फिर सोयाबीन की पिसाई होती है,  जिससे चिकना पदार्थ तेल व आटा अलग-अलग हो जाता है । इसी आटे से सोया बडी (मंगोडी) बनाई जाती है!

सोयाबीन तेल के नुकसान

आप चाहें तो किसी भी तेलघानी वाले के पास सोयाबीन बीज ले जा कर  उससे अपने सामने तेल निकालने के लिए कहें आपके द्वारा मुंहमांगे पैसे देने पर भी वह तेल नही निकालेगा, क्योंकि सोयाबीन का आटा बनता है, तेल नही । अब जब इस पाम आईल मिक्स सोयाबीन तेल को हम अपने भोजन में शामिल करते हैं तो यह बहुत धीमी गति से शरीर में रोगों की जड बनाता रहता है और फिर अचानक अपने उपयोगकर्ता को हॉस्पीटल और उपचार के चक्रव्यूह में फंसाकर अपनी सारी कम कीमत कई गुना बढे हुए अनुपात में वसूल करने के साथ ही शारीरिक त्रासदी अलग से देता है ।

इसके प्रयोग से होने वाले नुकसान के कारण ही कुछ लोग इसके एक ब्रांड फॉर्चून के लिये परिवार के फ्यूचर को बिगाडने वाला और सफोला को सपोला = सांप का बच्चा भी बोलते हैं । पहले के लोग 90 / 100 वर्ष की उम्र तक जीते थे और आज हम देख रहे हैं कि अचानक हार्ट अटैक आया और कुछ ही देर में 50 / 60 साल से उपर की उम्र का अच्छा-भला आदमी गुजर गया ।

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यह भी सही है कि हम कितनी भी कोशिश क्यों न करलें किंतु बाजार के संजाल से स्वयं को पूरी तरह से बचा भी नहीं सकते, किंतु यदि किसी मजबूरी में हमें इसका उपयोग करना पड ही रहा है तो हम यह कोशिश तो कर ही सकते हैं कि कितना कम से कम हम इसे अपने शरीर में जाने दे, लेकिन यदि आप इसी तेल में पूडी-कचौरी जैसे व्यंजन बहुतायद में बनाएंगे, खाएंगे तो उतनी ही तेजी से आज नहीं तो कल, रोगों की गिरफ्त में उलझना तो पडेगा ही । इसलिये यदि संभव हो आप मुंगफली या तिल्ली का तेल या और जो भी आपको फिल्टर रुप में खाद्य तेल उपलब्ध हो उसका प्रयोग अपने दैनंदिन के भोजन में प्रारम्भ कर सकते हैं ।

आप यदि खोज करेंगे तो सोयाबीन तेल के नुकसान के अनेकों वीडिओ आपको मिल जाएंगे । एक यहाँ भी हम दे रहे हैं, जो सिर्फ प्रतिकात्मक ही है-

 

 

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