टेंशन – एक सच यह भी…!

टेंशन के दुष्परिणाम

पिछले कुछ समय में देशवासियों ने एक के बाद एक तीन महत्वपूर्ण राजनैतिक हस्तियों को दुनिया से रुखसत होते देखा, जिनके बारे में हम सब जानते हैं, सर्वश्री अरुणजी जेटली, श्रीमति सुषमाजी स्वराज और श्री मनोहर पर्रिकर । जीते जी ये सभी दिग्गज अपने कार्यक्षेत्र में पूरी बुलन्दी से अपनी मौजूदगी दर्शाते रहे ।  इनमें से किसी पर भी न तो किसी सार्वजनिक भ्रष्टाचार का आरोप कभी लग पाया और न ही इनमें से किसी के किसी व्यसन में होने की आदत किसी के सामने कभी आई किन्तु कार्यभार के अत्यधिक टेंशन के कारण इनमें से कोई भी सामान्य वृद्धावस्था की उम्र तक नहीं पहुँच पाया । 

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ज्यादा टेंशन (स्ट्रेस) से क्या होता है 

        क्योंकि ये सभी किसी ना किसी दीर्घ रोग से ग्रसित थे,  हम ये तो सोच भी नही  सकते कि इनके खानपान में कोई कमी रही होगी,  या इन्हें अवसरानुकूल चिकित्सा सुविधाएँ नहीं मिल पाई होंगी, जबकि विश्वस्तर के सभी सुख-साधन इनकी पहुंच में थे, चौबीसों घंटों की उच्चतम चिकित्सा सुविधाएं तत्काल सुलभ थीं,  फिर ऐसा क्यों हुआ कि समय से पहले इन्हें दुनिया को अलविदा करना पडा ।

टेंशन से बचें

        यदि इस पर चिंतन किया जावे तो जो कारण सामने दिखेगा वो मुख्य रुप से लंबे समय तक शरीर की क्षमता से अधिक अपने काम का टेंशन/तनाव, जिसके चलते शरीर के पोषण हेतु आवश्यक खान-पान की समयानुसार अनदेखी और लगातार घंटों काम में व्यस्त बने रहने की बाध्यता, संबंधित ढेरों चिंताएँ और तनाव, ये ही ऐसे कारण दिखेंगे जो इनके असमय काल-कवलित होने का कारण बने, जबकि इस शरीर के दो जो बड़े घुन हैं,  उनमें पहला है जरुरत से ज्यादा आराम तलब जीवन और दूसरा असीमित व्यस्तता, तनाव व अत्याधिक मानसिक थकान जो शरीर को अपनी सामान्य स्थिति में नहीं रहने देते ।

        इसलिये अपने भावी स्वस्थ जीवन के लिये इन दोनों कारणों से हम अपने आप को यथासम्भव बचाएँ,  ताकि जीवन में किसी गंभीर व्याधि की सम्भावनाओं से हम अपना अधिकतम बचाव कर सकें, और इसके भी साथ जहाँ तक सम्भव हो मेडिकल ट्रीटमेंट,  दवाईयाँ,  डॉक्टर्स, हॉस्पीटल्स  से यथासम्भव दूरी बनाये रखने का प्रयास करते हुए ही अपना जीवन मार्ग चुनें, क्योंकी वर्तमान समय में अधिकांश हॉस्पीटल्स सिर्फ व्यापार के लिये चल रहे हैं  न कि हमें स्वस्थ रखने के लिये, यदि अस्पतालों में सुरक्षित स्वास्थ्य मिल पाता तो ये सब बड़े-बड़े लीडर आज हमारे बीच मौजूद होते जिसका देश को फायदा मिलता । लेकिन ऐसा लगता है कि अस्पताल जाकर आगे का पूरा जीवन पूर्ण स्वस्थ अवस्था में गुजारा जा सके यह सोच पाना आज किसी के लिये भी सम्भव नहीं है । बेशक आवश्यकतानुसार हॉस्पीटल जाकर उनकी सेवाएँ लेना कई बार आवश्यक हो जाता है, लेकिन उसके बाद भी सम्पूर्ण स्वास्थ्य तो शरीर को आवश्यक अनुकूल वातावरण में रखने पर ही बन पाता है । 

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टेंशन से मुक्ति

         इसलिये किसी के लिए भी कभी भूखे-प्यासे रहकर कार्य ना करें,  अपने बच्चों के लिए भी नहीं,  क्योंकि आपका शरीर यदि स्वस्थ है तो ही आप हैं, और आप हैं तो ही उन्हें भी लगातार सार-सम्हाल दे सकते हैं,  लेकिन हाय-हाय वाली जिन्दगी जीते हम ही न रहें तो ?  वह भी तब जबकि हम यह भी जानते हैं कि इस दुनिया में प्रत्येक प्राणी अपना भाग्य और कौशल साथ लेकर ही आता है, इसलिए किसी के लिए भी अत्यधिक चिंता ना करें,  जीते-जी इच्छाओं का कभी अंत हो नही सकता, अतः परिस्थितियों के अनुसार संतुष्ट रहना भी सीखें।

        बेशक जीवन मे ऊंचा पद बहुत मायने रखता है, लेकिन उससे भी अधिक महत्व हमारे अपने शरीर का है, क्योंकि हमारी महत्ता भी तभी तक है जब तक हमारा शरीर स्वस्थ व कार्यक्षम है । हमारा वास्तविक जीवन साथी भी हमारा शरीर ही है और जब तक शरीर स्वस्थ है  तब तक ही हमारा जीवन सार्थक है, इसलिये अपने जीवन की इस सार्थकता को बेहतर आहार-विहार व आचार-व्यवहार के द्वारा स्वयं के हित में बनाये रखना हमारी ही जिम्मेदारी है ।

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