च्यवनप्राश आंवला – स्वनिर्मित, सस्ता व स्वास्थ्यप्रद…

आंवला च्यवनप्राश

 

आंवला च्यवनप्राश

आयुर्वेद में च्यवनप्राश ऐसे गुणकारी औषध के रुप में जाना जाता है जिसका इतिहास हजारों वर्ष पूर्व के ग्रंथों में भी देखने को मिलता है । सभी आयुर्वेदिक फार्मेसी कंपनियां अपने-अपने ब्रांड के च्यवनप्राश बनाती हैं और इसका विदेशों तक निर्यात करके करोडों रुपयों के अपने व्यापार को चलाती बढाती रहती हैं ।

आंवला च्यवनप्राश को हम नियमित रुप से कम्पनियों के नामों जैसे- डाबर, वैद्यनाथ, झंडू आदि से तो देखते ही हैं, इसके अलावा इसकी विभिन्न मूल्यों पर आधारित अलग-अलग श्रेणियों भी देखने में आती हैं जैसे शाही, रजवाडी  व और भी अनेकों वैरायटी के च्यवनप्राश, किंतु मुख्य घटक आंवला ही होता है, और शरीर को इनसे मिलने वाले मुख्य लाभ वही होते हैं जो सामान्य तौर पर आंवले के नियमित सेवन से हमें या किसी को भी मिलते हैं ।

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चूंकि हर व्यक्ति न तो इतना मंहगा च्यवनप्राश खरीद पाता है और न ही वो इसकी आवश्यकता समझता है, किंतु इसकी नियमित उपलब्धि के मौसम में जैसे अक्टूबर-नबम्बर से जनवरी-फरवरी के मध्य हम अपने लिये स्वयं अपना घरेलू च्यवनप्राश बना सकते हैं वह भी बहुत कम खर्च में । आईये जानते हैं कैसे-

च्यवनप्राश बनाने का तरीका व सामग्री

आधा किलो ताजा आंवला धोकर व पानी डालकर इतना उबालें कि उसकी सब कलियां आसानी से अलग हो जाए । 20 के लगभग पिंडखजूर लेकर उसकी गुठलियां निकाल लें व शेष गूदे को थोडा पानी डालकर कुछ देर गलाकर फुलालें । अब आंवले की कलियों को मिक्सर जार में डालकर बारीक पीसकर अलग रख लें ।  फुलाये जा चुके पिंडखजूर को मिक्सर जार में थोडे से पानी के साथ डालकर उसमें आधा कप तुलसी की पत्तियों के साथ ही 50 ग्राम अदरक छिल-काटकर डाल दें । (यहाँ आप सुखी हुई सौंठ का पाव़डर भी काम में ले सकते हैं) व  इन सब सामग्री को भी बारीक पीसकर आंवले के पिसे मिश्रण में मिलालें ।

अब एक दूसरे सूखे जार में 10 लौंग, 10 इलायची, एक चम्मच काली मिर्च दरदरी डालने के साथ ही दो बडे टुकडे दालचीनी तोडकर मिलालें । एक टेबलस्पून जीरा, एक टेबलस्पून सौंफ, 4 नग तेजपत्ते तोडकर इसमें मिलाने के बाद इन सारे मसालों को पीसकर छान लें ।

गैस पर कडाही चढाकर उसमें करीब 50 ग्राम शुद्ध घी डालकर पिघलने पर पिसा हुआ आंवला, खजूर, तुलसी व अदरक (सौंठ) का मिश्रण मिला दें व अच्छे से मिलाकर चलाते हुए 5 मिनिट बाद लगभग 200 ग्राम या एक कप गुड फोडकर मिलादें । गुड के अच्छे से मेल्ट होने पर पूरा मिश्रण मिडियम आंच पर सिक जाने के बाद आंच कम करके हमारे सूखे व पिसे मसाले इसमें मिलाकर दो-तीन मिनिट और सिकने दें । पूरा सिकने तक इसका कलर भी चेंज हो जावेगा । अब इसे आंच से उतारने के पहले इसकी मिठास को चखकर देख लें व आवश्यक समझें तो थोडा गुड और मिला दें । इसके बाद ठंडा होने से पहले 10-12 पत्ती केशर भी इसमें पीसकर मिला दें । अब यदि आप खाते हैं तो ठन्डा होने पर इसमें आधा कप शहद भी मिलाकर रखलें ।

च्यवनप्राश के लाभ

इस प्रकार निर्मित हमारा ये च्यवनप्राश आप न सिर्फ ठंड के मौसम में बल्कि इसे कांच के जार में रखकर वर्ष भर उपयोग में ले सकते हैं । इसे एक चम्मच रात्रि में प्रतिदिन दूध के साथ लेते रहने पर ये न सिर्फ ये आपके इम्यूनसिस्टम (प्रतिरक्षातंत्र) को मजबूत रखेगा बल्कि आपके चेहरे की चमक, ताजगी और यौवनावस्था को बरकरार रखने में मददगार भी साबित होगा । इसके अलावा अनुभव में यह भी देखा गया है कि जिन लोगों को सुबह प्रायः कब्ज की शिकायत रहती है ये उसे भी प्रभावी तरीके से दूर करता है ।

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गुणवत्ता के आधार पर देखें तो बाजार में मिलने वाले च्यवनप्राश में जहाँ 40 प्रतिशत से भी अधिक तक शक्कर (चीनी) का उपयोग किया जाता है वहीं आप देख सकते हैं कि इस विधि में इसमें शक्कर बिल्कुल भी नहीं मिलाई गई है इसलिये शुगर फ्री होने के कारण इसका प्रयोग मधुमेह जैसे रोगी भी  कर सकते हैं ।

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