रोगों में मददगार – आंवला चिकित्सा

   आंवला चिकित्सा में उपयोगी प्रयोग

  आंवला चिकित्सा में उपयोगी

विटामिन सी का भंडार आंवला चिकित्सा में कितना उपयोगी है और इसके द्वारा किन-किन समस्याओं का उपचार किया जा सकता है, यहाँ हम इस जानकारी को आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं । 

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आंवले के स्वादिष्ट दीर्घकालिक उपयोग हेतु… 

 

निम्न रोगों में आंवला चिकित्सा-

चक्कर आना-  किसी भी कारण से यदि चक्कर आ रहे हों, तो मिट्टी या कांच के बर्तन में रात में एक गिलास पानी में 10 ग्राम सूखा आंवला व 5 ग्राम खडा धना डालकर रख दें । सुबह यथासम्भव खाली पेट पानी में गले इस सूखे आंवले व खडे धने को मसल व छानकर, आवश्यक समझें तो आधा-एक चम्मच शक्कर मिलाकर, 5-7 दिन लेते रहने से इस समस्या से मुक्त हुआ जा सकता है ।

बालों का झडना-  बहुत से स्त्री-पुरुषों के बाल स्नान करने,  बाल पोंछने-सुखाने के दौरान बहुत अधिक मात्रा में टूटते हैं । इससे बचाव हेतु दो गिलास पानी में दो चम्मच सूखा आंवला भिगोकर रात में रखें । सुबह उसी पानी में आंवले को मसल-छानकर, पानी निथार लें । उस पानी में एक नींबू का रस निचोडकर उससे शेम्पू के समान सिर धोएँ । इस उपचार को एक महिने करने पर बालों का झडना बंद होकर बाल चमकीले, घने, लंबे व मुलायम हो सकेंगे ।

मुंहासे होने पर-  50 ग्राम सूखे आंवले रात को एक गिलास पानी में मिलाकर रख दें । सुबह उन्हें मसल-छानकर छने हुए पानी में दो चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर पी लें,  बचे हुए गुदे को नहाने के आधा घंटे पूर्व मुंहासों पर मलकर स्नान करने से, तरुणाई की उम्र में किशोरवय युवाओं की इस समस्या का समाधान किया जा सकता है ।

पीलिया रोग में-  पीलिया निवारण के साथ ही लिवर की दुर्बलता दूर करने के लिए, आंवले का शहद के साथ चटनी बनाकर सुबह-शाम सेवन किया जाना चाहिए ।

आँखों के लिये-  10 ग्राम सूखे आंवले को कूट कर, दो घंटे तक एक गिलास पानी में भिगोकर, उस पानी को छानकर दिन में तीन बार उस पानी से छपाके से आँखें धोने, अथवा आई वॉशनर में डालकर आँखें डूबोकर पलकें झपकाने से, आँखों में खुजली, लालिमा व अन्य समस्याओं से बचाव होने के साथ ही आँखों की कार्य़क्षमता बढती है । चश्मे के नंबर का बढना रुक जाता है ।

बवासीर (मस्से)-  इस पीडादायक समस्या से बचाव हेतु, ताजे आंवले को पीसकर उसकी पीठी का एक मिट्टी के बर्तन में लेप कर दें । फिर उस बर्तन में छाछ भरकर 4 घंटे बाद उसी छाछ को रोगी को पिलाने से बवासीर में लाभ होता है । यदि बवासीर के मस्सों से अधिक रक्तस्राव होता हो,  तो एक चम्मच आंवला चूर्ण का सेवन दही की मलाई के साथ दिन में दो बार कुछ दिन करें ।

चिरयौवन के लिये-  जब तक ताजे आंवले मिलें,  दो-तीन आंवले के रस में आधा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण मिलाकर, उसमें 2 चम्मच शहद के साथ, आधा-पौन चम्मच घी मिलाकर, तैयार चटनी को दूध के साथ, रात्रि सोते समय सेवन करें । जब ताजे आंवले मिलना बंद हो जावे, तो एक चम्मच आंवला चूर्ण 2 चम्मच शहद व उससे एक तिहाई मात्रा में घी मिलाकर, रात्रि में दूध के साथ लेते रहें ।

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अलग-अलग रोगों में अलग-अलग विधियों से, चिकित्सा में आंवले के इस्तेमाल की विस्तृत चर्चा के लिये तो 50 पेज की पुस्तक भी शायद कम ही होगी । मुद्दे की बात यह है कि हम किसी भी रुप में यदि आंवले का नियमित सेवन कर पाएँ, तो अनेकों रोगों से न सिर्फ हमारा शरीर बचा रह सकता है, बल्कि हम अपनी शारीरिक क्षमताओं में इसके नियमित प्रयोग से निरन्तर बढोतरी होना महसूस कर सकते हैं ।

इसके लिये आवश्यक है कि, ताजे आंवलों की उपवब्धि के सीजन में, हम भी कुछ किलो आंवलों का भंडारण इस प्रकार करलें, कि वे न सिर्फ हमें बल्कि हमारे परिवारजन के भी नियमित रुप से, रुचिपूर्वक खाने में लगातार आते रह सकें ।

 

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