कैंसर का मुफ्त व प्राकृतिक उपचार…

श्री रसिकलाल माणिकचंद धारीवाल कैंसर हॉस्पिटल

श्री रसिकलाल माणिकचंद धारीवाल कैंसर हॉस्पिटल

सूरत (गुज.) से मुम्बई राजमार्ग पर सूरत से 78 किलोमीटर व वलसाड से 16 km ( सूरत की ओर) पर वाघलधारा गाँव है । जहाँ आपको “श्री प्रभव हेम कामधेनु गीरीविहार ट्रस्ट, पालीताणा” द्वारा संचालित “श्री रसिकलाल माणिकचंद धारीवाल कैंसर हॉस्पिटल”  दिखाई देगा । फल,  फूल व  खेतों से हरा-भरा हजारों चोरस मीटर मै फैला ये संकुल किसी आश्रम से कम नहीं है । यहाँ अत्यंत सुंदर  जैन मंदिर के साथ विशाल भोजनशाला भी है व यहां की गौशाला में करीब 400 देशी गाय हैं । यहां कैंसर के मरीज व उसके एक साथी को 10 दिन उपचार एवं ट्रेनिंग के लिए रखा जाता है । यहाँ 80 बेड उपलब्ध हैं । मुलाकाती यहाँ नास्ता,  लंच और डिनर के समय मरीज से मिल सकते हैं ।

Click & Read Also-

सबसे अनमोल क्या…?

प्रयास : स्वस्थ बने रहने का…

उपचार प्रक्रिया

कैंसर रोगियों के परिजनों को यहाँ सुबह 9 बजे एक बार सिर्फ 50 रुपये की रसीद निकलवाना होती है व अपने साथ रोगी की केस फाइल और अगर ऑपरेशन,  कीमोथैरेपी करवाई हो तो वो रिपोर्ट्स साथ ले जानी होती है । सुबह 10.30 से 12.30 और दोपहर 3.30 से 5.30 के समय डॉक्टर द्वारा रोगी की जांच के बाद उसे 10 दिन के लिए यहाँ एडमिट किया जाता है । यहाँ केवल कैंसर रोगी व उसके एक साथी को ही प्रवेश की अनुमति रहती है । रोगजन्य स्थिति में मरीज को बिलकुल मुफ्त एवं साथी को 11 दिन के लिए केवल 33 रुपये में नित्य सुबह नास्ता,  लंच व रात्रि भोजन के लिए 33 कूपन दिये जाते है,  इसके अलावा और कोई खर्च यहाँ नहीं होता । प्रारम्भ में 1000/- रु. की डिपॉज़िट राशि देना होती है जो 11वें दिन रसीद दिखाने पर वापस भी मिल जाती है, नियमानुसार 10 दिन से पहले उपचार छोड देने पर ये डिपॉज़िट राशि वापस नही मिलती ।

यहाँ की उपचार प्रक्रिया में- सुबह के समय 5.30 बजे से योग- प्राणायाम,  7 बजे गाय के गोबर,  गौमुत्र,  गाय का दूध,  दही व  घी से बना पंचगव्य मिश्रण, 8 से 9 बजे के बीच नास्ता, 9 बजे गौमुत्र के साथ आयुर्वेदिक टेबलेटस, 9 से 10 तक शरीर के कैंसरग्रस्त भाग मे गोबर, गौमुत्र का लेप लगाकर धूप मे बैठना, 10 बजे काढा (उकाळा), 11 से 1 बजे के बीच लंच व लंच के बाद आयुर्वेदिक टेबलेटस दी जाती है ।

फिर अपरान्ह 2 से 3 बजे सभाग्रह में मरीज के खानपान एवं उपचार के लिए सवाल जवाब व  चर्चा के साथ 3.30 बजे काढा (उकाळा) दिया जाता है ।

सायंकाल 5 से 6 बजे के बीच भोजन व  उसके बाद आयुर्वेदिक टेबलेट्स दी जाती है व रात्रि 8 बजे से 9.30 बजे तक सत्संग, कीर्तन और फिर अंत में रोगी को दूध दिया जाता है ।

यही दिनचर्या 10 दिन चलती है व 11वें दिन आप 1 महिने की दवाई (करीब 2500 से 4000 रुपए तक की) लेकर अपने घर लौट सकते हैं,  घर पर भी ठीक यहीं की तरह कम से कम एक साल तक बताये गये परहेज के साथ रोगी का उपचार जारी रखना होता है व महीने,  दो महीने में फिर दवाइयाँ लेने जाना होता है ।

यहाँ की मुख्य बातें-

गरीब या अमीर सबके लिए समान व्यवहार, एक समान नियम, कोई वीआइपी कल्चर नहीं ।

अत्यन्त निष्ठावान,  प्रामाणिक, मिलनसार व  सेवाभावना मे लीन स्टाफ, यहाँ डॉक्टर्स व स्टाफ साथ में ही समान भोजन लेते हैं ।

तीन समय सभा,  सत्संग व भोजन के समय मोबाइल उपयोग पर प्रतिबंधित रहता है ।

8वें दिन अगर आपकी इच्छा हो या अनुकूल हो तो यहाँ के ऑफिस से प्रमाणित फॉर्म भरकर व रोगी व आप का आधारकार्ड लेकर केवल 16 किलोमीटर दूर वलसाड रेलवे स्टेशन पर  रोगी के लिये बिल्कुल फ्री और साथी की 50% यात्री किराये की छूट  पर confirm  रेल टिकट मिल जाती है । एक महीने के बाद 1 बार आने- जाने के लिए भी फॉर्म साथ में ले जाने पर यह सुविधा प्राप्त होती रहेगी ।

Click & Read Also-

सुखी कौन ?

बेकिंग सोडा व नींबू का मिश्रण… 

स्वस्थ जीवन के लिये मैथुन-सुख का महत्व… 

टाटा हॉस्पिटल मुम्बई के साथ ही देश के बड़े-बड़े हॉस्पिटल में लाखों रुपये खर्च करके भी मृत्यु के समीप पहुँच चूके मरीज थक-हार के सैकडों की संख्या मे यहाँ आशा के साथ आते हैं ।

आपके परिचय के दायरे में यदि किसी भी संबंधित व्यक्ति को यहाँ की सेवाएँ लेने की आवश्यकता लगती हो तो यहाँ का सम्पर्क नं. Vaghaldhara Hospital  08141880808.  06354514539 उपलब्ध है जहाँ आप पहले से जानकारी लेकर व अपनी जानकारी देकर जाएंगे तो आपके लिये अधिक सुविधाजनक होगा ।

एक संक्षिप्त वीडिओ यहीं से सम्बन्धित…

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.