अब बनाईये केल्शियम युक्त आंवले का मुरब्बा

आंवले की उपयोगिता व इसके विभिन्न प्रयोगों के संदर्भ में इसी ब्लॉग में हम अपनी पिछली पोस्ट में आवश्यक चर्चा कर चुके हैं, अब समझते हैं आंवले का ऐसा मुरब्बा बनाने की विधि जो केल्शियम से परिपूर्ण होने के कारण सभी उम्र वर्ग के लोगों के लिये  उपयोगी होने के साथ ही प्रौढ व वृद्ध स्त्री-पुरुषों के लिये विशेष उपयोगी है । इसके लिये आप-

आंवले का मुरब्बा कैसे बनाते हैं

 

आंवले का मुरब्बा कैसे बनाएं

इस केल्शियम युक्त आंवले का मुरब्बा बनाने के लिये एक किलो आंवले पानी में भिगोदें व चौबीस घंटे उन्हें गलने दें । चौबीस घंटे बाद पानी से निकालकर पानी बदलकर फिर से गलाकर रखदें । इस प्रकार दो दिन बाद उन्हें पानी से निकालकर साफ कपडे से पोंछकर कांटे से प्रत्येक आंवले को चौतरफा गोद लें । अब पानी में लगभग 250 ग्राम चूना घोलकर उस चूने के पानी में इन आंवले को अगले चौबीस घंटे गलने दें व 4-6 घंटे में इसे हिलाते रहें जिससे कि इनमें चूने का पर्याप्त अंश मिक्स हो जावे । पानी की मात्रा इनके डूबे रहने जितनी ही रखें । इस प्रकार तीन दिन गुजरने के बाद अब इन आंवले को पानी से निकालकर साफ पानी से धो लें व कपडे या पेपर पर डालकर इनका अतिरिक्त पानी सूख जाने दें ।

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आंवले के स्वादिष्ट दीर्घकालिक उपयोग हेतु… 

अब 500 ग्राम पानी में 50 ग्राम पिसी मिश्री घोलकर गर्म करें व ये आंवले उस पानी में डालकर आंच पर आधे गलने तक उबाल लें व फिर इन्हें उस पानी से निकालकर सूखे कपडे पर फैलाकर डाल दें । अब लगभग डेढ किलो (1500 ग्राम) शक्कर की चाशनी बनाएँ व एक उबाल आने पर ये आंवले उसमें डालकर दस मिनिट पकाकर वापस उतारकर उसी बर्तन में ऐसे ही ढांककर रखे रहने दें । दूसरे दिन फिर इन्हें आग पर रखकर उबालें व चाशनी में एक तार बनने तक उबालकर आंच से उतार लें । 10 ग्राम इलायची के दाने और आधा या एक ग्राम केसर पत्ती आवश्यकतानुसार घोंट-पीसकर कर इसमें डाल दें । ठण्डा होने पर इस आंवले का मुरब्बे को बर्नी में भरकर इस तैयार मुरब्बे का प्रतिदिन सेवन करें । इसी प्रकार जितना भी मात्रा में आप इसे बनाना चाहें सामग्री का अनुपात उसी मात्रा में कम-ज्यादा करलें ।

इस आंवले का मुरब्बा की और भी गुणवत्ता बढाने के लिये यदि आप चाहें तो एक किलो आंवले पर 10 ग्राम प्रवालपिष्टी भी इसमें मिला सकते हैं । उपरोक्त आंवले का मुरब्बा आप भोजन के दो घण्टे पहले या बाद में प्रतिदिन सेवन करें । यह न सिर्फ पर्याप्त स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर की दाह (अतिरिक्त गर्मी), सिरदर्द, आंखों की जलन व कमजोरी, कब्ज, बवासीर, त्वचारोग, रक्त व धातु विकार, चक्कर आना, दिल-दिमाग व शारीरिक कमजोरी जैसी अनेक समस्याओं को दूर करता है व इसके सेवन से शरीर पुष्ट व सशक्त होता है । इसमें भी प्रवालपिष्टी युक्त आंवले का मुरब्बा विशेष गुणकारी होता है जो पित्त विकार, अन्तर्दाह व शारीरिक क्षीणता नष्ट करता है । (लगभग 20-25 वर्ष पूर्व स्वास्थ्य पत्रिका निरोगधाम से प्राप्त इस फार्मूले से मेरे अपने घर में आंवले का ये मुरब्बा हर दूसरे वर्ष बनकर प्रयुक्त हो रहा है) ।

आंवलेे का मुरब्बा के फायदे-

इसके सेवन से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है अतः सामान्य अवस्था में वैसे तो अनावश्यक रोग पास आते नहीं और जो छोटे-बडे रोग हों वे भी धीरे-धीरे उपचारित हो जाते हैं एवं उपरोक्त वर्णित शारीरिक समस्याओं का निदान भी इसकी मदद से होता चलता है । एक जानकारी और आंवले प्रयुक्त हो चुकने के बाद जो चाशनी बची रह जाती है वह भी खराब नहीं होती बल्कि वह भी आंवले के औषधिय गुण से परिपूर्ण होती है, अतः उसका प्रयोग हम बच्चों को ब्रेड या ठंडी रोटी पर लगाकर व  गर्मी के मौसम में इस चाशनी को पानी में शर्बत की तरह डालकर पीते हुए शरीर को अतिरिक्त तरावट दिलाने के काम में ले सकते हैं ।

वैसे भी जब तक बाजार में ताजे आंवले मिलते रहें तब तक दाल-सब्जी बनते समय उसमें दो ताजे आंवले डाल दें जिससे कि सीजकर ये बिल्कुल नरम हो जाएँ, अब इन्हें मसलकर व गुठली निकालकर स्वाद के अनुरुप शक्कर-बुरा मिलाकर अपने भोजन के साथ नियमित रुप से इनका सेवन करें या इस मिश्रण में 4 बीजरहित मुनक्का व आधा चम्मच सौंठ का पावडर मिलाकर भोजन के एक घण्टे बाद एक चम्मच शहद मिलाकर यदि इसका सेवन करें तो यह प्रयोग ह्दय, फेफडे व शरीर के पाचन संस्थान को हष्ट-पुष्ट करने के साथ ही श्र्वास कष्ट, दमा, खांसी, सिर चकराना व हायपरएसिडिटी जैसे सभी शारीरिक दोषों का उपचार भी करता है ।

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इसलिये प्रकृति की इस नेमत का इसके सीजन में मिलते रहने तक अलग प्रकार से व सीजन समाप्त होने पर अन्य प्रकार से इस आंवले व आंवले का मुरब्बा का नियमित उपयोग करें व अपने शरीर की कार्यक्षमता को जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में बरकरार रखें ।

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