केल्शियम का रखें ध्यान – बने रहें सदा जवान

केल्शियम की कमी से समस्या

शरीर में केल्शियम का महत्व-

          शरीर में केल्शियम की कमी के कारण कुछ लोग जहाँ 40-45 की उम्र में ही जोडों व हड्डियों के दर्द के साथ स्थाई तौर पर अनिद्रा जैसी समस्याओं की गिरफ्त में फंसे दिखते हैं वहीं कुछ अन्य परिचित अपने बेहतर आहार-विहार के बूते 65-70 की उम्र में भी अपने शरीर में इसी केल्शियम के व्यवस्थित स्तर को मैनेज रखते चुस्ती-फूर्ति के साथ मस्त जीवन जीते दिख जाते हैं । ऐसे सभी लोग जो अनिद्रा के साथ ही हड्डियों व जोडों में दर्द की समस्याओं से जूझ रहे हैं उनके सामान्य उपचार के लिये KEM हॉस्पीटल के डॉक्टर कोठारी अपने अनुभव के आधार पर सलाह देते हैं कि-

 

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 नींद की समस्या-

          शरीर में जब केल्शियम का स्तर सामान्य से कम होता है तो पर्याप्त नींद नहीं आती । लेकिन यदि इसका स्तर सामान्य से उपर लाने की कोशिश की जावे तो शरीर दर्द के साथ ही अनिद्रा की यह समस्या भी दूर हो जाती है । शरीर में केल्शियम के स्तर को सुधारने के लिये सुबह के समय मौसम्बी या संतरा खाना चाहिये । ध्यान रखना है कि इनका जूस नहीं पीना है बल्कि फल ही खाना आवश्यक है ।

          इसका कारण बताते हुए वे कहते हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में एजिंग फेक्टर शुरु होता है जिसके प्रभाव से हमारी हड्डियों में क्षरण की प्रक्रिया चालू हो जाती है और इसी प्रक्रिया के चलते-बढते हमारे शरीर में बुढापा आता है । यदि इस एजिंग प्रक्रिया को नियंत्रण में रखकर बुढापे के क्रम को हमें धीमा करना हो तो इसके लिये सुबह के समय मौसम्बी या संतरा खाना ही चाहिये क्योंकि जो केल्शियम हमारे शरीर से ड्रेन होकर इन समस्याओं का कारण बनता है उस प्रक्रिया को सिर्फ मौसम्बी और सन्तरा ही रोककर एजिंग नियंत्रित करते हैं ।

          दूसरा नियम यह कि भोजन के बाद केल्शियम से भरपूर सफेद तिल और जीरा बराबर मात्रा में मिला हुआ एक-एक चम्मच नित्य सुबह-शाम कच्चा ही खाना चाहिये । क्योंकि जहाँ कच्चा जीरा व तिल हमारे ह्रदय की कार्यप्रणाली के सुचारु परिचालन में लाभदायक होते हैं वहीं भुना हुआ तिल ह्रदय के लिये नुकसानप्रद होता है ।

हड्डियों की कमजोरी-

          इसके अतिरिक्त घुटनों में या शरीर के किसी भी जोड में यदि दर्द रहता हो तो 150 ग्राम  कडीपत्ता (मीठा नीम) की चटनी बनाकर व उस चटनी को अपनी चपाती (रोटी) के आटे में गूंथकर उस आटे की बनी हुई रोटी 2 महिने तक खाएं । कडीपत्ते में मौजूद केल्शियम की प्रचुरता से आपका वह दर्द हमेशा के लिये दूर हो जावेगा । इस उपाय से लाभान्वित होने वाले रोगी ने बताया कि इससे मेरा घुटनों का वर्षों पुराना दर्द तो दूर हुआ ही इसके साथ ही 72 वर्ष की उम्र में मेरे घिसे हुए दांत भी बढने लगे हैं । हम जानते हैं कि दांतों की मजबूती का आधार भी केल्शियम ही होता है ।

केल्शियम से प्राप्त मजबूती

          इसके साथ यदि हम सुबह 10 बजे से पहले और शाम को 5 बजे के बाद रोजाना 20-25 मिनिट अपने शरीर को धूप में रख सकें तो इससे हमारे शरीर की पैराथॉयराईड ग्लैंड सक्रिय होती है और पैराथॉयराईड ग्लैंड जो विटामिन शरीर में पैदा करती है उसी विटामिन से हमारे शरीर में विटामिन D जनरेट होता है और यही विटामिन D  सिलिकॉन (जिसे हम अपने भोजन में ककडी जैसे भोज्य पदार्थों से प्राप्त कर सकते हैं) के साथ मिलकर जो केल्शियम जनरेट करता है उससे हमारी हड्डियों को मजबूती मिलती है । इसलिये सुबह व शाम की धूप में 20 मिनिट रोजाना रहने का क्रम हमे अवश्य बनाना चाहिए ।

          अंत में Drumstick  ड्रमस्टीक (जिसे हम सूरजने की फली के नाम से भी जानते हैं)  और फूलगोभी के पत्तों में केल्शियम के भंडार मौजूद हैं य़दि हम उपलब्धता के अनुसार इनके सेवन में निरन्तरता बनाए रख सकें तो हमारे शरीर में केल्शियम की कभी कमी नहीं रहेगी और हम हमेशा जोडों व हड्डियों के दर्द व कमजोरी के साथ ही बुढापे की सामान्य प्रक्रिया से स्वयं को अधिक से अधिक दूर रख सकेंगे ।

 

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अतः अपने शरीर को लम्बे समय तक रोगमुक्त व स्फूर्त अवस्था में बनाये रखने के लिये हमें-

  1.  रोजाना सुबह एक मौसम्बी या संतरा खाना चाहिये,
  2.  150 ग्राम कडीपत्ते की चटनी आटे में मिलाकर रोटी बनाकर दो माह तक खाना चाहिये,
  3.  भोजन के बाद एक चम्मच कच्चा जीरा व तिल्ली खाना चाहिये,
  4.  उपलब्धता के अनुसार ड्रमस्टीक व फूल गोभी के पत्ते सब्जी बनवा कर खाना चाहिये
  5.  सुबह 10 के पहले व शाम 5 के बाद 20-25 मिनिट धूप में रहना चाहिये ।

 

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