About Us

अपने 68 वर्ष के अब तक के जीवनकाल में स्नातक शिक्षा के बाद पहले 1970 में प्रिन्टिंग विधा फिर 1974 में पब्लिकेशन हाऊस के कार्यकारी अनुभव के बाद 1990 में स्वास्थ्य पत्रिका निरोगधाम से एक जिज्ञासु पाठक के रुप में जुडाव हुआ और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों से कम खर्च में विभिन्न रोगों के उपचार हेतु बढती जिज्ञासा के कारण इनसे सम्बन्धित अन्य जानकारियां विभिन्न माध्यमों से प्राप्त कर व अपने इर्द-गिर्द के सम्बन्धितों को उनसे लाभान्वित होते देखकर 2010 से इन संग्रहित जानकारियों को जनसामान्य तक पहुँचाने के प्रयास में अपने प्रिन्टिंग व पब्लिकेशन के अनुभवों को जोडते हुए ब्लॉग माध्यम से इनका प्रसार प्रारम्भ करने का प्रयास किया और इन्हें और भी विस्तारित करने के क्रम में अब यहाँ आपके सम्मुख उपलब्ध हूँ ।

उम्मीद करता हूँ कि जटिल समझे जाने वाले विभिन्न रोगों से बचाव हेतु यहाँ प्रस्तुत जानकारियां आपके या आपके मित्रों, परिचितों व परिजनों के जीवन में उपयोगी साबित हो सकेंगी ।

यहाँ मैं यह स्पष्ट कर देना भी आवश्यक समझता हूँ कि ये जानकारियां आपके सामान्य स्वास्थ्य को बनाये रखने में व समस्याओं के सीमित निदान में तो उपयोगी होंगी किन्तु यदि किसी व्यक्ति के शरीर में ऐसा कोई भी रोग घर कर चुका है जिसके निदान हेतु वे एलोपैथिक डॉक्टर्स के निर्देशन में आधुनिक दवाईयां ले रहे हैं तो उन्हें अपनी दवाईयां बगैर डॉक्टरी सलाह के बंद नहीं करना ही उचित होगा । अलबत्ता आप उन दवाईयों के साथ दो घंटे का अंतराल रखते हुए इन सहायक उपचारों का यदि प्रयोग करे तो दवाईयों पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम करने के बारे में सोच सकते हैं ।

इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति के शरीर में ऐसा कोई भी रोग या समस्या मौजूद हो जिसका अंतिम विकल्प सर्जरी (ऑपरेशन) ही बताया गया है तो हमें यह समझ लेना भी आवश्यक है कि आधुनिक ऐलोपैथिक चिकित्सा पद्धति ही वहाँ सर्वाधिक कारगर साबित होगी ।

आपके सुझावों का सदैव स्वागत व प्रतिक्षा के साथ…

सुशील बाकलीवाल
इन्दौर (म. प्र.)